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Home Ghazals & Poems

बहुत रोज़ हुए, चाँद से हमारी अच्छी दोस्ती थी

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बहुत रोज़ हुए,
चाँद से
हमारी
अच्छी दोस्ती थी
हर रोज
चाँद आता मेरे पास
ढेर सारी बातें करता
और चला जाता
एक दिन
मैने उस से कही
अपने दिल की बात
चाँद मेरे दोस्त
क्यूं नहीं
रुक जाते तुम
यहीं मेरे पास,
जाते हो ..
तो बहुत याद आते हो ,
चाँद ने कुछ नहीं कहा
चला गया चुपचाप
फिर कभी
आया नहीं लौटकर|
 
बहुत रोज़ हुए
जब चाँद आता था
मेरे पास
अब सिर्फ़
उसकी यादें आती हैं..

 
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