दिल के आईने में
देखना खुद को
और कहना फिर
खुद से ही
अपने दिल की बातें
राह चलते
रोक लेना कभी खुद को
और सुनना खड़े होकर
अपने दिल की बातें
सपने देखते
खुल जाएँ जो आँख कभी
और हो कमरे में
घुप्प अँधेरा
बहने देना अपनी आँखों से
अपने दिल की बातें
ज़िंदगी देती नहीं मौके
बार बार कहने का
गर, राह चलते
मिल जाऊं कभी मैं तुम्हें
कहने देना अपने लबों को
अपने दिल की बातें
अकेली शाम
लेकर आती है क्षितिज पर
सितारों का हुजूम
और कुछ ऐसे चेहरे
जो चले गए दुनिया से
कहे बगैर
अपने दिल की बातें
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